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आदिम गूंज ७

गुमनाम इतिहास

१
जब एक फूल
तोड़ लेने भर से
मच जाती है
तारों में भी खलबली
फिर
वक्त के किसी भी
लम्हे में क्यों
मिलता नहीं कहीं
जिक्र तक अपना
........
........

२

वक्त का कारवां
गुजरता रहता है सामने से
किसी अजनबी की तरह
और वक्त की झिर्रियों में से
झाकते भर रह जाते हैं
अजूबा और पहेली बनकर
........
........

-उज्जवला ज्योति तिग्गा-